14 મે, 2011

खुदाइ


वाह रे खुदा क्या मस्त है तेरी खुदाइ,
तु दे ना पाया कुछ ओर सीवा जुदाइ.

ए खुदा अगर तु होता मेरी जगाह,
तो तु मांगता मुजसे इसकी वजाह.

पर मे नही इतना बेगैरत
ये सुन के होगी तुजे हैरत

तु दे दर्द या तु जीतना भी कर जुल्म,
पर मेरे पास है गमो को पीने का इल्म.

आज तेरे ही सामने लेता हु शपथ, चाहे जींदगी कीतनी भी हो कमबक्त,
फीर भी हार न मान के जीते जी मर के भी जीऊंगा हर घडी हर वक्त.

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